Saturday, 15 November 2014

रास्ता

रास्ता है खराब,
और मजबूरी है जनाब,
चलना उसी पे है |

काँटे बेहिसाब,
मंज़िल है कोसों दूर,
पाना उसी को है |

नफरत चारों ओर,
प्यार नदारद हुज़ूर 
ढूंढना उसी को है |

पराये मिले सब ओर 
अपने दिल से दूर,
करीब लाना उन्ही को है 

अपना दिल साफ,
औरों से ही दरकार,
निभाना उन्ही को है |

निराशा  फैली चारों ओर,
आशा छिपी कहीं ओर,
ढूंढ के लाना उसी को है |

रिश्तों  की कडवाहट घनी 
जीवन मूल्य बिड़ला, 
तलाशना उसी को है |

अहम का वट  व्रुक्ष बढ़  रहा ,
अपनो के लिये  समय  नहीं ,
पाना एक  ही  को है |
(प्रकाशित :केसर (पंजाब) २०१४ पृ . ७२)
-राजेश सोनी "राज"

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