Tuesday, 18 November 2014

मंज़िल

राहें मंज़िल जो चला होगा
निश्चित ही वो छला होगा |
गर की होगी अमृत की लालसा,
उसे गरल ही मिला होगा |

प्यार लुटाया प्यार पाने को,
हर कदम पे धोखा मिला होगा |
विश्वास कर लिया सहसा उस पे,
जो दो कदम भी साथ छला होगा |

मौसम के साथ उसका मिज़ाज़ मनचला होगा,
दिल लगाकर जो दिलजला होगा |
हुआ होगा सुकून अपने परवानेपन पर,
रात भर जो शमा के साथ जला होगा |
(प्रकाशित :शुभ  प्रभात (सागर) २०१३ पृ .६६)

_राजेश सोनी "राज"

No comments:

Post a Comment