राहें मंज़िल जो
चला होगा,
निश्चित ही वो छला
होगा |
गर की होगी
अमृत की लालसा,
उसे गरल ही
मिला होगा |
प्यार लुटाया प्यार
पाने को,
हर कदम पे
धोखा मिला होगा
|
विश्वास कर लिया सहसा
उस पे,
जो दो कदम
भी साथ छला
होगा |
मौसम के साथ
उसका मिज़ाज़ मनचला
होगा,
दिल लगाकर जो
दिलजला होगा |
हुआ होगा सुकून
अपने परवानेपन पर,
रात भर जो
शमा के साथ
जला होगा |
(प्रकाशित :शुभ प्रभात (सागर) २०१३ पृ .६६)
_राजेश सोनी
"राज"
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