अगस्त माह में मुझे ग़ाज़ियाबाद उ.प्र. की साहित्यिक संस्था मंज़िल ग्रुप साहित्यिक मंच द्वारा धार शहर में रोटरी क्लब के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया , जो की मेरे लिए हर्ष एवं सौभाग्य का विषय रहा ।।
कुछ लम्हे मेरे साथ - राजेश सोनी "राज"
मेरे ह्रदय के सागर की अंतहीन गहराइयों से कुछ चुनिन्दा कविताओं का छोटा सा गुलदस्ता...................
Tuesday, 2 October 2018
Sunday, 30 September 2018
Tuesday, 26 January 2016
हर हाल में खुश रहना सीख
परेशानियों से बड़े अपने हौसले रखना सीख ,
जितनी बार गिरें , उतनी बार खड़े होना सीख I
नाकामियों से मत घबरा मेरे ए दोस्त ,
नाकामियों से भी सबक लेना सीख II
हवाएँ तेज चलेंगी , सर्द चलेंगी , लू देगी, डगमगाएंगी ,
आँधियों से लड़ने का हौसला बरक़रार रखना सीख I
परिस्थितियां कैसी भी भी आएं जीवन में बार-बार ,
सोच बदल और हर हाल में खुश रहना सीख II
- राजेश सोनी " राज "
Monday, 25 January 2016
इस गणतंत्र
प्रिय मित्रों,
सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें , बधाई... ,
इस गौरवशाली अवसर पर मेरी एक कविता आप सब के सामने :
तरक्की का मंत्र
, इस गणतंत्र
आओ मिलकर
जपें ,
चलो इस
ओर एक कदम
चलें |
इतिहास का मनन
, इस गणतंत्र
आओ मिलकर
करें ,
चलो एक
बार फिर इतिहास
बनायें
संविधान की जय
जयकार , इस गणतंत्र
आओ मिलकर
लगायें |
इस बार
संविधान को समझ
में लाएं |
एक नई
मंज़िल, नया आकाश
, इस गणतंत्र
सब मिलकर
पायें ,
चलो हम
सब इसे पाने
की प्रतिज्ञा दोहराएं
|
देशभक्ति का जज़्बा,
इस गणतंत्र
सब मे फिर से
जगायें ,
आज़ादी के खातिर
हुए शहीदो को
जेहन में लाएं
|
विकासशील भारत,
इस गणतंत्र
दुनिया भर में
अपनी जगह बनायें
,
चलो हम
अपनी जिम्मेदारी निभाएं
|
बहुत कुछ
पा चुके, बहुत
कुछ पाना है
इस गणतंत्र
विश्वगुरु बन के
दुनिया में छाना
है,
इस दिशा
में हमें मिलकर
कदम बढ़ाना है |
स्वच्छ भारत का
मिशन, इस गणतंत्र
पूरे भारत में फैलाना
है ,
दिनचर्या में , अपनी
आदतों में शुमार
लाना है I
सभी बुराइयों
को, कुरीतियों को
इस गणतंत्र
अपने जीवन
से दूर भगाना है,
रोते हुए
लबों पे खुशियां
लाना है I
तरक्की का मंत्र
, इस गणतंत्र
................... I
- राजेश सोनी " राज
"
Saturday, 15 August 2015
सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं
वेतन के
लिए तो काम
करते है सब
जरा वतन
के लिए करे
कुछ तो कुछ
बात बने I
जंग के
लिए तो हुंकार
भरते है सब,
अमन के
लिए करे काम
तो कुछ बात
बने I
द्वेष भावना से
भरे है सब
-
भाई चारे
की करे पहल
तो बात बने
I
पंद्रह अगस्त मना
रहें हैं सब
-
मानसिक ग़ुलामी से
मुक्त हो तो
कुछ बात बने
I
दुनिया बदलने की
बात करते हैं
सब,
खुद को
बदलने की करे
शुरुआत तो कुछ
बात बने ।
उनहत्तर साल हुए
आज़ादी को -
शहीदों को करे
सच्चे मन से
याद तो कुछ
बात बने ।
आओ हिलमिल
कर साथ बढ़ाये
कदम -
देश को
दुनिया में सिरमौर
बनाये हम तो
कुछ बात बने
।
भटक चुके
कर्त्तव्य पथों से
हम चलते चलते
-
दो कदम
मंज़िल की और
बढ़े तो कुछ
बात बने
होगा राष्ट्र
का चहुँ ओर
विकास गर,
अपना अपना
फ़र्ज़ ईमानदारी से
निभाएं हम ।
सर्वोपरि राष्ट्र को
मान-
और बेहतर
इस को बनाये
तो कुछ बात
बने ।
तज दे
सारी बुराइयों को
, कुरीतियों को -
देश को
आत्मनिर्भर बनायें हम तो
कुछ बात बने
।
आओ पंद्रह
अगस्त शान से,
गर्व से मनाये हम -
अपने अंदर
सच्ची आज़ादी लाये
हम ॥
- राजेश सोनी " राज
"
Monday, 19 January 2015
क्षणिकाये
जब्त
है दास्तान चिलमन कि, जो है आग़ोश में किसी के,
खुदा जाने कितनी मुश्किल से जब्त करता है।
जवाब
पहली पहली नज़र जो मिली
उनसे,
मुद्दतों से मिलने का सबब
याद आया |
सवाल करने चले थे खुद से
ही वो,
खुद को खुद का ही जवाब
याद आया ||
पछतावा
कहने को तो कह देते है
वो,
हमे तुमसे प्यार नहीं |
फिर इस कदर पछताते है बस-
पूछो ही मत ||
निगाहें
हमने जब भी कोई बात कहनी
चाही,
तो निग़ाह उसने झुका ली |
जब हमने निग़ाह हटा ली,
तो उसने सारी बात कह डाली
||
चांद
करो ना बात ज़रा दीदार तो
करने दो,
रात का चांद मेरी छत पे
उतर आया है |
आग़ोश-ए-मुहब्बत मे
बांधना चाहा था -
मगर वो क़हर ढाने पे उतर
आया है ||
प्रकाशित-सामाजिक आक्रोश
16-1-2007
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