ग्लोबल वार्मिंग ने सारा मौसम बिगाड दिया,
ज़मीन, आसमान , पानी सब खराब कर दिया |
सांस लेने को भी शुद्ध हवा नसीब नहीं.,
खुदगर्ज़ी में कुदरत को भी ललकार दिया |
चैत जाये गर अब भी, सब ठीक हो जाएगा,
प्रकृति का बिगडा संतुलन सुधर जाएगा |
खुद का जीवन तो सुधरेगा ही,
आने वाली पीढी का भी भला हो जाएगा |
नही चैते गर अब भी, कुछ नहीं बचेगा,
मानव अनुकूल मौसम धरा पे नहीं बचेगा |
बाड़ ,सूखा, बिखरा कालचक्र, कुछ नहीं बचेगा |
होंगे इन सबके लिये हम स्वयम ही जिम्मेदार,
हरियाली कम, प्रदूषित पानी, प्रदूषित धरा हमने की,
प्रकृति की चेतावनी भी हमने अनसुनी की,
रहेंगे गुनहगार आने वाली पीढी के जब उनके लिये कुछ
नहीं बचेगा |
-राजेश सोनी
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