Monday, 19 January 2015

क्षणिकाये

              जब्त 
है दास्तान चिलमन कि, जो है आग़ोश में किसी के,
खुदा जाने कितनी मुश्किल से जब्त करता  है।
             
             जवाब
पहली पहली नज़र जो मिली उनसे,
मुद्दतों से मिलने का सबब याद आया |
सवाल करने चले थे खुद से ही वो,
खुद को खुद का ही जवाब याद आया ||

            पछतावा
कहने को तो कह देते है वो,
हमे तुमसे प्यार नहीं |
फिर इस कदर पछताते है बस-
पूछो ही मत ||

            निगाहें
हमने जब भी कोई बात कहनी चाही,
तो निग़ाह उसने झुका ली |
जब हमने निग़ाह हटा ली,
तो उसने सारी बात कह डाली ||

             चांद
करो ना बात ज़रा दीदार तो करने दो,
रात का चांद मेरी छत पे उतर आया है |
आग़ोश-ए-मुहब्बत मे बांधना चाहा था -
मगर वो क़हर ढाने पे उतर आया है ||
  - राजेश सोनी "राज"
प्रकाशित-सामाजिक आक्रोश

16-1-2007       

Sunday, 18 January 2015

क्षणिकाये

महक
ये क्यूं मेरे तसव्वुर में महक सी छाई  है ,
लगता है जरूर किसी बात पे तू मुस्कराई है ||
  - राजेश सोनी "राज"

              अजनबी
पूछ लेना पता मेरा अपने ही दिल से,
वरना, हम तो अपने ही लिये अजनबी से हो गये ||
  - राजेश सोनी "राज"


               आदत
मेरी खामोशी को गलत ना समझना यारों-
तन्हाई मे यूं ही मुस्कुराने की आदत है |
 - राजेश सोनी "राज"

                लड़ाई
उनकी लड़ाई भी कुछ अजीब है यारों,
के कत्ल करने चले है और हाथ मे खंजर भी नहीं ||
 - राजेश सोनी "राज"

               यादों के साये
तेरी यादों के साये हमे इस कदर सताते है,
कि हम उजाले मे आने से कतराते है ||
 - राजेश सोनी "राज"

प्रकाशित-सामाजिक आक्रोश (सहारनपुर)

7-4-2006. पृ. (4)

कसक

कसक कम नहीं होगी, मेरे   दोस्त |
दूसरों को युँ दास्तां  सुनाते सुनाते ||

              - राजेश सोनी "राज"

कसक


कसक कम नहीं होगी, मेरे   दोस्त |
दूसरों को युँ दास्तां  सुनाते सुनाते ||

  - राजेश सोनी "राज"

आईना

तोड़ दो अब जिंदगी के आईने को ,
कि तस्वीर तुम्हारी धुँधली नज़र आने लगी है।
- राजेश सोनी "राज"

प्रकाशित : जन प्रवाह (ग्वालियर)

२९ ऑक्टोबर- ४ नोव २००६ (पृ. :४)

Saturday, 3 January 2015

सूचना

प्रिया मित्रों :-
मैं स्व प्रमाणित करता हूँ कि इस ब्लॉग पर प्रकाशित सभी रचनाएं (संदर्भित चित्र के अतिरिक्त ) मेरी खुद कि मौलिक अभिव्यक्ति हैं ।
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आपका ही 
राजेश सोनी "राज"
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ग्राम : सेजवाया ,
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जिला : धार (म.प्र.) ४५४७७३
दूरभाष : ०९९२६३४७२५९

मेरे घर आना जिंदगी


मैंने तुम्हारे लिये एक सपनों का महल बनाया है, 
मेरे घर आना जिंदगी |
खुशबूओं से महकाया है पोर पोर उसका ,
मेरे घर आना जिंदगी |
सर्द सुबह की गुलाबी धूप से गरमाया है,
मेरे घर आना जिंदगी |
आ जाती है बहारे तुम्हारे आने से,
मेरे घर आना जिंदगी |
धडकती सासो में, उफन्ती आस में -
मेरे घर आना जिंदगी |
खडी है स्वागत मे तुम्हारे लिये फिज़ा भी ,
मेरे घर आना जिंदगी |
टूटकर बिखर जाऊंगा गर रूठ गई तुम तो,
मेरे घर आना जिंदगी |

प्रकाशित : राष्ट्र-किंकर (नई दिल्ली) १०-१६ मई २००५ , प्र . ६
- राजेश सोनी "राज"

मुझे तुम्हारी याद आई है

जब भी सितारों ने महफिल में -
अपनी दास्तां सुनाई है -
मुझे तुम्हारी याद आई है
मदमस्त होकर जब भी हवा -
पागल सी मस्ताई है ,
मुझे तुम्हारी याद आई है
गाती रही रात भर चाँदनी ,
महकती सी एक गज़ल -
मुझे तुम्हारी याद आई है
कट रही है उम्र भी इंतजार में -
वक्त ने जब जब की बेवफ़ाई है ,
मुझे तुम्हारी याद आई है
 प्रकाशित : सामाजिक आक्रोश (पाक्षिक),सहारनपुर (उ.प्र.) १६।०६।२००६ प्र.४

- राजेश सोनी "राज"