कागज कलम
दवात ला
,
मन में अच्छे ख़यालात ला।
पा जाये मंजिल को आखिर ,
कुछ ऐसे हालात ला।
हौसला हरदम बढ़ता रहे,
दिल में ऐसे जज्बात ला।
औरों के लबो पे हो मुस्कान ,
खुशियों की ऐसी बरसात ला।
सब मानेंगे तुझको को खुद- ब - खुद।
अपने अन्दर वो बात ला।
जुड़ जायेगा कारवां अपने आप,
लोगो को अपने साथ ला।
मन में अच्छे ख़यालात ला।
पा जाये मंजिल को आखिर ,
कुछ ऐसे हालात ला।
हौसला हरदम बढ़ता रहे,
दिल में ऐसे जज्बात ला।
औरों के लबो पे हो मुस्कान ,
खुशियों की ऐसी बरसात ला।
सब मानेंगे तुझको को खुद- ब - खुद।
अपने अन्दर वो बात ला।
जुड़ जायेगा कारवां अपने आप,
लोगो को अपने साथ ला।
(प्रकाशित :
कामना (बिहार) २०१४ पृ. ९७
कीर्ति कलश ( नागपुर), अंक ५ ,
सामाजिक आक्रोश (सहारनपुर) १६।११।२०१२,पृ .४ )
-राजेश सोनी
"राज"
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