महक
ये क्यूं मेरे तसव्वुर में
महक सी छाई है ,
लगता है जरूर किसी बात पे तू मुस्कराई है ||
- राजेश सोनी
"राज"
अजनबी
पूछ लेना पता मेरा अपने ही दिल से,
वरना, हम तो अपने ही लिये अजनबी से हो गये ||
- राजेश सोनी
"राज"
आदत
मेरी खामोशी को गलत ना समझना यारों-
तन्हाई मे यूं ही मुस्कुराने की आदत है |
- राजेश सोनी
"राज"
लड़ाई
उनकी लड़ाई भी कुछ अजीब है यारों,
के कत्ल करने चले है और हाथ मे खंजर भी नहीं ||
- राजेश सोनी
"राज"
यादों के साये
तेरी यादों के साये हमे इस कदर सताते है,
कि हम उजाले मे आने से कतराते है ||
- राजेश सोनी
"राज"
प्रकाशित-सामाजिक आक्रोश (सहारनपुर)
7-4-2006. पृ. (4)
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