Sunday, 18 January 2015

क्षणिकाये

महक
ये क्यूं मेरे तसव्वुर में महक सी छाई  है ,
लगता है जरूर किसी बात पे तू मुस्कराई है ||
  - राजेश सोनी "राज"

              अजनबी
पूछ लेना पता मेरा अपने ही दिल से,
वरना, हम तो अपने ही लिये अजनबी से हो गये ||
  - राजेश सोनी "राज"


               आदत
मेरी खामोशी को गलत ना समझना यारों-
तन्हाई मे यूं ही मुस्कुराने की आदत है |
 - राजेश सोनी "राज"

                लड़ाई
उनकी लड़ाई भी कुछ अजीब है यारों,
के कत्ल करने चले है और हाथ मे खंजर भी नहीं ||
 - राजेश सोनी "राज"

               यादों के साये
तेरी यादों के साये हमे इस कदर सताते है,
कि हम उजाले मे आने से कतराते है ||
 - राजेश सोनी "राज"

प्रकाशित-सामाजिक आक्रोश (सहारनपुर)

7-4-2006. पृ. (4)

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