जब भी सितारों ने
महफिल में -
अपनी दास्तां सुनाई
है -
मुझे तुम्हारी याद
आई है ।
मदमस्त होकर जब
भी हवा -
पागल सी मस्ताई
है ,
मुझे तुम्हारी याद
आई है ।
गाती रही रात
भर चाँदनी ,
महकती सी एक
गज़ल -
मुझे तुम्हारी याद
आई है ।
कट रही है
उम्र भी इंतजार
में -
वक्त ने जब
जब की बेवफ़ाई है
,
मुझे तुम्हारी याद
आई है ।
प्रकाशित : सामाजिक आक्रोश (पाक्षिक),सहारनपुर (उ.प्र.) १६।०६।२००६ प्र.४
- राजेश सोनी
"राज"
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