मैंने तुम्हारे लिये एक सपनों का महल बनाया
है,
मेरे घर आना जिंदगी |
खुशबूओं से महकाया है पोर पोर उसका ,
मेरे घर आना जिंदगी |
सर्द सुबह की गुलाबी धूप से गरमाया है,
मेरे घर आना जिंदगी |
आ जाती है बहारे तुम्हारे आने से,
मेरे घर आना जिंदगी |
धडकती सासो में, उफन्ती आस में -
मेरे घर आना जिंदगी |
खडी है स्वागत मे तुम्हारे लिये फिज़ा भी ,
मेरे घर आना जिंदगी |
टूटकर बिखर जाऊंगा गर रूठ गई तुम तो,
मेरे घर आना जिंदगी |
प्रकाशित : राष्ट्र-किंकर (नई दिल्ली) १०-१६ मई २००५ , प्र . ६
- राजेश सोनी
"राज"
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