Sunday, 18 January 2015

आईना

तोड़ दो अब जिंदगी के आईने को ,
कि तस्वीर तुम्हारी धुँधली नज़र आने लगी है।
- राजेश सोनी "राज"

प्रकाशित : जन प्रवाह (ग्वालियर)

२९ ऑक्टोबर- ४ नोव २००६ (पृ. :४)

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