प्रिय मित्रो,
एक लघु अन्तराल के बाद फिर आपसे मुखातिब हूँ।
अपनी प्रकाशित कृतियों के बारे में आपसे जिक्र करूँगा।
" जिंदगी " में प्रथम बार अपनी रचनाओ को एक पुस्तक का आकर दे आपका स्नेह पाया था। मैं आभारी हूँ उनका जिन्होंने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से मेरी हौसला अफजाई की। इसी आशीर्वाद के हीकारण मैं जल्द ही दूसरे काव्य संकलन " तलाश " के द्वारा आपके सन्मुख पुनः आया।इस काव्य संकलन के द्वारा मैंने अपनी दिल की बात आप लोगो से बांटी,तथा इस बार भी आपकी अमूल्य राय से अवगत हुआ। यही मेरे निरंतर आगे बढ़ने का संबल बना और मेरीकाव्य यात्रा अनवरत चलती रही। दोनो संकलन के मुखपृष्ट हाज़िर है। शेष फिर। धन्यवाद।


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