Thursday, 7 February 2013

खोट

ये अजब सी चोट है,
के दिलो में उनके खोट है।
कैसे पहचाने उनको,
सब तरफ से ओट है।

ये कौन सा दस्तूर है,
इस बेरहम दुनिया का।
गरीबों की इस बस्ती में,
हुआ भगवान नोट है।

निकले है घर से,
प्यार की तलाश में ए राज।
हुआ सामना जिस भी शख्स से ,
मिला दिलों में उनके खोट है।
(प्रकाशित :सामाजिक आक्रोश १ एप्रिल २०१३ पृ .४)
-राजेश सोनी "राज"


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